बैसाखी तिथियाँ — धर्मयुगम्
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बैसाखी (वैसाखी) तिथियाँ कैलेंडर

किसी भी साल के लिए बैसाखी की सटीक तिथि — सिख फसल उत्सव और पंजाबी नव वर्ष। बैसाखी फसल के मौसम की शुरुआत और 1699 में खालसा पंथ की स्थापना का प्रतीक है।

बैसाखी हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाई जाती है। यह फसल के मौसम और पंजाबी नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। तिथि सौर कैलेंडर द्वारा निर्धारित की जाती है और जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तब मनाई जाती है।

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इस टूल को कैसे उपयोग करें

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बैसाखी क्या है?

बैसाखी, जिसे वैसाखी के नाम से भी जाना जाता है, पंजाब और दुनिया भर के सिखों द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है। यह फसल के मौसम और पंजाबी नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। सिखों के लिए इस त्योहार का बहुत महत्व है क्योंकि यह 1699 में गुरु गोबिंद सिंह द्वारा आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना का स्मरण कराता है। बैसाखी बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है और इसमें गुरुद्वारों में जाना, नगर कीर्तन में भाग लेना, भांगड़ा और गिद्दा नृत्य करना और पारंपरिक भोजन का आनंद लेना शामिल है।

बैसाखी का महत्व

🌾

फसल उत्सव

बैसाखी पंजाब में फसल के मौसम की शुरुआत है, विशेष रूप से गेहूं की फसल।

⚔️

खालसा पंथ की स्थापना

1699 में, गुरु गोबिंद सिंह ने बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की, जिसने सिखों को उनकी अनूठी पहचान दी।

🎊

पंजाबी नव वर्ष

बैसाखी को पंजाबी नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है, जो एक नई शुरुआत का प्रतीक है।

बैसाखी की विधियाँ और उत्सव

🏛️

गुरुद्वारा दर्शन — अरदास, कीर्तन, पाठ का आयोजन

🚶

नगर कीर्तन — पंज प्यारे के साथ जुलूस

🕺

भांगड़ा और गिद्दा — पारंपरिक पंजाबी नृत्य

🍚

लंगर — सामूहिक भोज, सभी के लिए मुफ्त

🏊

पवित्र स्नान — नदियों और सरोवरों में डुबकी

🎵

कीर्तन — गुरबानी संगीत, शबद कीर्तन

🪁

पतंग उड़ाना — उत्सव का हिस्सा

🤝

आशीर्वाद — बड़ों से आशीर्वाद लेना

बैसाखी की उत्पत्ति

बैसाखी की उत्पत्ति पंजाब की फसल उत्सव परंपराओं में हुई है। यह त्योहार सदियों से फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता रहा है। 1699 में, दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना करके बैसाखी को एक नया आध्यात्मिक महत्व दिया। इस घटना ने बैसाखी को एक विशुद्ध कृषि त्योहार से सिखों के लिए एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया। आज, बैसाखी न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर के सिख समुदायों में भी मनाई जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बैसाखी कब मनाई जाती है?

बैसाखी हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाई जाती है। यह सौर वर्ष और पंजाब में फसल के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है।

बैसाखी का सिख महत्व क्या है?

1699 में, गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की। यह सिख इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था।

बैसाखी और मेष संक्रांति में क्या संबंध है?

बैसाखी तब मनाई जाती है जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। इस दिन को मेष संक्रांति कहा जाता है और यह सौर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।

क्या इस टूल की तिथि सटीक है?

हाँ, बैसाखी सौर कैलेंडर द्वारा निर्धारित की जाती है। दिखाई गई तिथि सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के आधार पर गणना की गई है।

बैसाखी न चूकें

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नोट: यहाँ की बैसाखी तिथि सौर कैलेंडर (सूर्य के मेष राशि में प्रवेश) के आधार पर गणना की गई है। यह त्योहार पारंपरिक रूप से हर साल 13 या 14 अप्रैल को पड़ता है।