रथ यात्रा (चैरियट फेस्टिवल) तिथियाँ कैलेंडर
किसी भी साल के लिए रथ यात्रा की सटीक तिथि — भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा जो पुरी, ओडिशा में मनाई जाती है। रथ यात्रा हिंदू माह आषाढ़ (जून-जुलाई) के शुक्ल पक्ष की द्वितीया (दूसरे दिन) को पड़ती है।
रथ यात्रा हिंदू माह आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की द्वितीया (दूसरे दिन) को मनाई जाती है। यह पुरी, ओडिशा में जगन्नाथ मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। यह टूल आपके स्थान के लिए सटीक तिथि और सूर्योदय का समय निकालता है।
इस टूल को कैसे उपयोग करें
01
साल चुनें
जिस साल की रथ यात्रा तिथि चाहिए वह डालें।
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अपना शहर चुनें
एक प्रीसेट शहर चुनें या 'कस्टम' चुनकर अपना अक्षांश, देशांतर और समय क्षेत्र डालें।
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गणना करें दबाएँ
टूल रथ यात्रा तिथि ढूंढता है और सूर्योदय का समय निकालता है।
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देखें और एक्सपोर्ट करें
तिथि, सूर्योदय और संबंधित जानकारी देखें।
रथ यात्रा क्या है?
रथ यात्रा, जिसे चैरियट फेस्टिवल के नाम से भी जाना जाता है, पुरी, ओडिशा में मनाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक है। यह त्योहार भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक की वार्षिक यात्रा का प्रतीक है। देवताओं को विशाल लकड़ी के रथों पर स्थापित किया जाता है जिन्हें हजारों भक्त खींचते हैं। यह त्योहार हिंदू माह आषाढ़ (जून-जुलाई) के शुक्ल पक्ष की द्वितीया (दूसरे दिन) को मनाया जाता है।
रथ यात्रा का महत्व
भगवान जगन्नाथ की यात्रा
रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ की गुंडिचा मंदिर में अपनी मौसी के घर वार्षिक यात्रा का प्रतीक है।
एकता और भक्ति
हजारों भक्तों द्वारा रथों को खींचना एकता, भक्ति और समुदाय की सामूहिक भावना का प्रतिनिधित्व करता है।
जगन्नाथ का आशीर्वाद
मान्यता है कि जो लोग रथ यात्रा में भाग लेते हैं या रथों को देखते हैं, उन्हें भगवान जगन्नाथ का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
रथ यात्रा की विधियाँ और उत्सव
🚩
रथ निर्माण — विशाल लकड़ी के रथों का निर्माण
🙏
पूजा-अर्चना — देवताओं की विशेष पूजा
🚶
रथ खींचना — हजारों भक्त रथ खींचते हैं
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भजन-कीर्तन — जय जगन्नाथ के गीत
🍚
महाप्रसाद — भगवान का भोग वितरण
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गुंडिचा मंदिर — 9 दिनों तक विश्राम
🪁
उत्सव — सांस्कृतिक कार्यक्रम
🤝
आशीर्वाद — भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करना
रथ यात्रा के तीन रथ
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नंदीघोष — भगवान जगन्नाथ का रथ, 45 फीट ऊँचा
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तालध्वज — बलभद्र का रथ, 44 फीट ऊँचा
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दर्पदलन — सुभद्रा का रथ, 43 फीट ऊँचा
🪷
दर्शन — रथों के दर्शन से मिलता है पुण्य
रथ यात्रा की उत्पत्ति
रथ यात्रा की उत्पत्ति प्राचीन काल से हुई है और यह पुरी, ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी है। इस त्योहार का उल्लेख विभिन्न हिंदू शास्त्रों में मिलता है और यह एक हजार वर्षों से अधिक समय से मनाया जा रहा है। कथा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, अपने भाई-बहनों के साथ, गुंडिचा मंदिर की यात्रा करते हैं, जिसे उनकी मौसी का घर माना जाता है। गंग वंश के शासनकाल के दौरान इस त्योहार को प्रमुखता मिली और तब से यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक बन गया है, जो दुनिया भर से लाखों भक्तों को आकर्षित करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रथ यात्रा कब मनाई जाती है?
रथ यात्रा हिंदू माह आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की द्वितीया (दूसरे दिन) को मनाई जाती है, जो आमतौर पर जून या जुलाई में पड़ती है।
मुख्य रथ यात्रा कहाँ मनाई जाती है?
मुख्य रथ यात्रा पुरी, ओडिशा, भारत के जगन्नाथ मंदिर में मनाई जाती है।
तीन रथों के क्या नाम हैं?
तीन रथ हैं: नंदीघोष (भगवान जगन्नाथ), तालध्वज (बलभद्र) और दर्पदलन (सुभद्रा)।
क्या इस टूल की तिथि सटीक है?
हाँ, तिथि हिंदू चंद्र-सौर कैलेंडर के आधार पर गणना की गई है। सटीक तिथि स्थान के आधार पर एक दिन भिन्न हो सकती है।
रथ यात्रा न चूकें
अपना ईमेल दें — हम आपको रथ यात्रा से पहले सूचित करेंगे, ताकि आप उत्सव की तैयारी कर सकें।
नोट: यहाँ की रथ यात्रा तिथि हिंदू चंद्र-सौर कैलेंडर के आधार पर गणना की गई है। सटीक तिथि के लिए कृपया स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
