प्रदोष व्रत तिथियाँ — धर्मयुगम्
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प्रदोष व्रत तिथियाँ कैलेंडर

पूरे साल की प्रदोष (पवित्र गोधूलि) तिथियाँ अपने शहर के हिसाब से निकालें — सटीक तिथि और विशेष वार जैसे सोमप्रदोष, भौमप्रदोष, और भी बहुत कुछ।

यह गणना सूर्योदय-आधारित तिथि नियम और मध्य-सटीक सौर/चंद्र देशांतर सूत्रों पर आधारित है। प्रदोष व्रत त्रयोदशी (तिथि 13) को गोधूलि काल में पड़ता है। कृपया किसी भी अनुष्ठान से पहले अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर लें।

पूरे साल की सूची देखने के लिए “प्रदोष तिथियाँ निकालें” दबाएँ।

प्रदोष व्रत क्यों?

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भगवान शिव की कृपा

प्रदोष भगवान शिव की पूजा का सर्वोत्तम समय है। यह व्रत पिछले कर्मों को नष्ट करता है और आध्यात्मिक उन्नति देता है।

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गोधूलि की शक्ति

सूर्यास्त से पहले का 1.5 घंटे का गोधूलि काल ध्यान और जाप के लिए अत्यंत शक्तिशाली होता है; ब्रह्मांडीय ऊर्जाएँ संतुलित होती हैं।

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त्रयोदशी तिथि

त्रयोदशी (13वीं तिथि) शिव को अत्यंत प्रिय है, और प्रदोष व्रत कृष्ण तथा शुक्ल पक्ष दोनों की त्रयोदशी को किया जाता है।

विशेष प्रदोष के नाम

सप्ताह के दिन के अनुसार प्रदोष के विशेष नाम होते हैं:

रवि रविप्रदोष
सोम सोमप्रदोष
मंगल भौमप्रदोष
बुध बुधप्रदोष
गुरु गुरुप्रदोष
शुक्र शुक्रप्रदोष
शनि शनिप्रदोष

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रदोष व्रत कब किया जाता है?

कृष्ण और शुक्ल पक्ष दोनों की त्रयोदशी (13वीं तिथि) को, सूर्यास्त से लगभग 1.5 घंटे पहले गोधूलि काल में।

एक साल में कितने प्रदोष होते हैं?

आमतौर पर 24 (प्रत्येक चंद्र मास में दो)। यह टूल चयनित साल के सभी प्रदोष दिखाता है।

क्या उपवास अनिवार्य है?

कई भक्त प्रदोष पर आंशिक या पूर्ण उपवास रखते हैं। शाम की प्रदोष पूजा के बाद व्रत तोड़ा जाता है। यह व्यक्तिगत इच्छा है।

कोई प्रदोष न चूकें

अपना ईमेल दें — हर आने वाले प्रदोष से पहले याद दिलाएँगे।

नोट: यहाँ की प्रदोष तिथियाँ गणना की गई हैं — महत्वपूर्ण अनुष्ठानों के लिए हमेशा स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।