पूर्णिमा तिथियाँ — धर्मयुगम्
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पूर्णिमा तिथियाँ कैलेंडर

पूरे साल की पूर्णिमा (पूर्ण चाँद) तिथियाँ अपने शहर के हिसाब से निकालें — सटीक तिथि और विशेष पूर्णिमा नाम जैसे कार्तिक पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, और भी बहुत कुछ।

यह गणना सूर्योदय-आधारित तिथि नियम और मध्य-सटीक सौर/चंद्र देशांतर सूत्रों पर आधारित है। सूर्योदय के आस-पास के सीमा मामलों में कभी-कभी एक दिन का अंतर आ सकता है — कृपया किसी भी अनुष्ठान से पहले अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से सटीक तिथि की पुष्टि कर लें।

पूरे साल की सूची देखने के लिए “पूर्णिमा तिथियाँ निकालें” दबाएँ।

इस टूल को कैसे उपयोग करें

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साल चुनें

जिस साल की पूर्णिमा तिथियाँ चाहिए वह डालें — बीता हुआ, चालू, या आने वाला साल।

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अपना शहर चुनें

एक प्रीसेट शहर चुनें या 'कस्टम' चुनकर अपना अक्षांश, देशांतर और समय क्षेत्र डालें।

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गणना करें दबाएँ

टूल पूरे साल को स्कैन करके उन सभी तिथियों की सूची देता है जहाँ आपके स्थानीय सूर्योदय पर पूर्णिमा (तिथि 15) व्याप्त होती है।

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विशेष नाम देखें

हर पंक्ति में पूर्णिमा की तिथि और उसका विशेष नाम दिखता है, जैसे कार्तिक पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, या शरद पूर्णिमा।

पूर्णिमा क्या है?

पूर्णिमा पूर्ण चाँद का दिन है — हिंदू चंद्र कैलेंडर के शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि। इसे आध्यात्मिक अभ्यास, अनुष्ठानों और उत्सवों के लिए अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। पूर्ण चाँद पूर्णता, समृद्धि और दिव्य प्रकाश का प्रतीक है। कई महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार, जैसे गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और वट पूर्णिमा, इस दिन पड़ते हैं।

पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?

पूर्णिमा को आध्यात्मिक महत्व, उपवास और दान के दिन के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि पूर्ण चाँद मन और आत्मा की ऊर्जा को बढ़ाता है, जिससे यह ध्यान, मंत्र जाप और अनुष्ठानों के लिए आदर्श समय बनता है। कई भक्त पूर्णिमा पर पूरे दिन का उपवास रखते हैं और चंद्र देव और अपने पितरों को प्रार्थना अर्पित करते हैं। यह दान (दान) और जरूरतमंदों को भोजन देने का भी दिन है।

पूर्णिमा मनाने के लाभ

🌕

आध्यात्मिक उन्नति

पूर्ण चाँद आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है, जिससे ध्यान और जाप अधिक प्रभावी होते हैं।

🧠

मानसिक स्पष्टता

पूर्णिमा पर उपवास और प्रार्थना मन को शांत करती है और मानसिक स्पष्टता लाती है।

🙏

दिव्य आशीर्वाद

पूर्णिमा पर पूजा करने से चंद्र देव और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

🎁

दान और पुण्य

पूर्णिमा पर दान देना अत्यंत पुण्यकारक और पवित्र करने वाला माना जाता है।

🌿

शारीरिक स्वास्थ्य

पूर्णिमा पर कभी-कभार उपवास पाचन तंत्र को विश्राम देता है और समग्र कल्याण को बढ़ावा देता है।

🪷

पूर्णता और संतुष्टि

पूर्ण चाँद पूर्णता का प्रतीक है, और इस दिन अनुष्ठान करने से संतुष्टि की भावना आती है।

ये बिंदु सामान्य परंपरा और लोकप्रिय मान्यता को दर्शाते हैं, चिकित्सीय सलाह नहीं हैं। किसी भी स्वास्थ्य स्थिति वाले व्यक्ति को व्रत या सख्त कार्यक्रम से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

विशेष पूर्णिमा के नाम

प्रत्येक पूर्णिमा का चंद्र मास के आधार पर एक अलग नाम और महत्व है:

चैत्र (Mar-Apr)

चैत्र पूर्णिमा — हनुमान जयंती का दिन, वसंत उत्सव

वैशाख (Apr-May)

वैशाख पूर्णिमा — बुद्ध पूर्णिमा (बुद्ध जयंती)

ज्येष्ठ (May-Jun)

ज्येष्ठ पूर्णिमा — वट सावित्री व्रत

आषाढ़ (Jun-Jul)

गुरु पूर्णिमा — व्यास पूर्णिमा, गुरु पूजा का दिन

श्रावण (Jul-Aug)

श्रावण पूर्णिमा — रक्षा बंधन, नारियल पूर्णिमा

भाद्रपद (Aug-Sep)

भाद्रपद पूर्णिमा — पितृ पक्ष की शुरुआत

आश्विन (Sep-Oct)

शरद पूर्णिमा — शरद ऋतु की पूर्णिमा, कोजागरी व्रत

कार्तिक (Oct-Nov)

कार्तिक पूर्णिमा — दीपोत्सव, गुरु नानक जयंती

अग्रहायण (Nov-Dec)

अग्रहायण पूर्णिमा — मार्गशीर्ष पूर्णिमा, दत्तात्रेय जयंती

पौष (Dec-Jan)

पौष पूर्णिमा — शाकंभरी पूर्णिमा

माघ (Jan-Feb)

माघ पूर्णिमा — कुंभ मेला का मुख्य दिन

फाल्गुन (Feb-Mar)

फाल्गुन पूर्णिमा — होली पूर्णिमा, रंगों का त्योहार

ये नाम और संबंध पारंपरिक हिंदू चंद्र कैलेंडर पर आधारित हैं और क्षेत्र के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं।

हिंदू परंपरा में पूर्णिमा का महत्व

हिंदू अनुष्ठानों और त्योहारों में पूर्णिमा का विशेष स्थान है। ऐसा कहा जाता है कि पूर्ण चाँद का दिन वह है जब दिव्य ऊर्जा अपने चरम पर होती है, जिससे यह आध्यात्मिक अभ्यासों के लिए आदर्श समय बनता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ पूर्णिमा से जुड़ी हैं, जिनमें भगवान बुद्ध का जन्म (वैशाखी पूर्णिमा), दत्तात्रेय का प्रादुर्भाव (मार्गशीर्ष पूर्णिमा), और भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का दिन (श्रावण पूर्णिमा) शामिल हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पूर्णिमा उपवास का दिन है?

हाँ, कई भक्त पूर्णिमा पर पूरे दिन का उपवास रखते हैं, अक्सर सूर्योदय से सूर्यास्त या चंद्रोदय तक। कुछ 'फलाहार' उपवास (केवल फल और डेयरी) या पानी सहित पूर्ण उपवास भी रखते हैं। व्रत आमतौर पर शाम के अनुष्ठानों और चंद्र पूजा के बाद तोड़ा जाता है।

पूर्णिमा पर कौन से अनुष्ठान किए जाते हैं?

सामान्य अनुष्ठानों में चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करना, चंद्र मंत्रों का जाप करना, दान करना, गरीबों को भोजन देना और पितरों को तर्पण करना शामिल है। कई लोग मंदिरों में जाते हैं, विशेष पूजा करते हैं, और भक्ति गायन और जाप में भाग लेते हैं।

एक साल में कितनी पूर्णिमाएँ होती हैं?

आमतौर पर एक साल में 12 पूर्णिमाएँ होती हैं — प्रत्येक चंद्र मास के लिए एक। कभी-कभी, एक साल में 13 पूर्णिमाएँ हो सकती हैं जब एक अतिरिक्त चंद्र मास (अधिक मास) होता है। यह टूल चयनित साल के लिए सभी पूर्णिमा तिथियों की गणना करता है।

क्या इस टूल की तिथि सूची १००% सही है?

यह मध्य-सटीक खगोलीय सूत्रों का उपयोग करता है, जो लगभग सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए सही हैं, लेकिन सूर्योदय के बहुत करीब की तिथि संक्रमण कभी-कभी प्रकाशित पंचांग से एक दिन अलग हो सकते हैं। महत्वपूर्ण तिथियों को हमेशा अपने विश्वसनीय स्थानीय पंचांग या पुरोहित से क्रॉस-चेक करें।

कोई पूर्णिमा न चूकें

अपना ईमेल दें — हम आपको हर आने वाली पूर्णिमा से पहले बता देंगे, ताकि आप अपनी प्रार्थना, उपवास और अनुष्ठानों की तैयारी पहले से कर सकें।

नोट: यहाँ की पूर्णिमा तिथियाँ गणना की गई हैं, किसी प्रकाशित पंचांग से ली नहीं गई हैं — विवाह, बड़ी विधि, या परंपराओं में अंतर होने पर, कृपया पुरोहित या विश्वसनीय स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।