विशु (मलयालम नव वर्ष) तिथियाँ कैलेंडर
किसी भी साल के लिए विशु की सटीक तिथि — केरल में मनाया जाने वाला मलयालम नव वर्ष। विशु सूर्य के मेष राशि में प्रवेश का प्रतीक है और विशुक्कनी, आतिशबाजी और पारंपरिक भोज के साथ मनाया जाता है।
विशु उस दिन मनाया जाता है जब सूर्य मलयालम सौर कैलेंडर के अनुसार मेष राशि में प्रवेश करता है। यह आमतौर पर हर साल 14 या 15 अप्रैल को पड़ता है। यह त्योहार विशुक्कनी (शुभ वस्तुओं का पहला दर्शन), विशु सद्या (भोज) और आतिशबाजी के साथ मनाया जाता है।
इस टूल को कैसे उपयोग करें
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साल चुनें
जिस साल की विशु तिथि चाहिए वह डालें।
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गणना करें दबाएँ
टूल सौर कैलेंडर के आधार पर विशु तिथि ढूंढता है।
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देखें और एक्सपोर्ट करें
तिथि और संबंधित जानकारी देखें, टेक्स्ट कॉपी करें, या प्रिंट करें।
विशु क्या है?
विशु केरल, भारत में मनाया जाने वाला पारंपरिक मलयालम नव वर्ष है। यह उस दिन पड़ता है जब सूर्य मलयालम सौर कैलेंडर के अनुसार मेष राशि में प्रवेश करता है, जो आमतौर पर हर साल 14 या 15 अप्रैल को होता है। यह त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है और इसमें विशुक्कनी (एक पीतल के बर्तन में सजाई गई शुभ वस्तुओं का पहला दर्शन), विशु सद्या (भव्य भोज) और आतिशबाजी जैसे रिवाज शामिल हैं। लोग इस दिन नए कपड़े भी पहनते हैं, बच्चों को पैसे देते हैं और मंदिरों में जाते हैं।
विशु का महत्व
सौर नव वर्ष
विशु मलयालम सौर वर्ष की शुरुआत है जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है।
विशुक्कनी
विशुक्कनी का पहला दर्शन पूरे वर्ष समृद्धि, सौभाग्य और खुशी लाने वाला माना जाता है।
फसल का मौसम
विशु केरल में फसल के मौसम के साथ मेल खाता है, जो प्रकृति की बहुतायत का उत्सव है।
विशु की विधियाँ और उत्सव
👀
विशुक्कनी — शुभ वस्तुओं का पहला दर्शन
🍚
विशु सद्या — पारंपरिक भव्य भोज
🎆
आतिशबाजी — पटाखे और आतिशबाजी
👗
नए कपड़े — नए पारंपरिक कपड़े पहनना
💰
विशु कैनेट्टम — बच्चों को पैसे देना
🙏
मंदिर दर्शन — मंदिरों में विशेष पूजा
🌿
फूलों की सजावट — विशुक्कनी में फूल
🤝
आशीर्वाद — बड़ों से आशीर्वाद लेना
विशु की उत्पत्ति
विशु की उत्पत्ति प्राचीन काल से हुई है और केरल की कृषि परंपराओं में गहराई से निहित है। यह त्योहार सौर कैलेंडर पर आधारित है, जो सूर्य के मेष राशि में प्रवेश का प्रतीक है। विशु का उल्लेख विभिन्न प्राचीन तमिल और मलयालम ग्रंथों में मिलता है और सदियों से मनाया जाता रहा है। विशुक्कनी परंपरा मान्यता से उत्पन्न हुई है कि विशु के दिन पहला दर्शन आने वाले वर्ष के भाग्य को निर्धारित करता है। वर्षों से, विशु केरल की संस्कृति, एकता और समृद्धि का एक भव्य उत्सव बन गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
विशु कब मनाया जाता है?
विशु हर साल 14 या 15 अप्रैल को मनाया जाता है, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है।
विशुक्कनी क्या है?
विशुक्कनी एक पीतल के बर्तन में सजाई गई फूल, फल, अनाज, सोना और सिक्के जैसी शुभ वस्तुओं का पहला दर्शन है। इसे समृद्धि और सौभाग्य लाने वाला माना जाता है।
विशु सद्या क्या है?
विशु सद्या केले के पत्तों पर परोसा जाने वाला एक भव्य पारंपरिक भोज है। इसमें चावल, सांबर, रसम, अवियल, पायसम और कई अन्य केरल व्यंजन शामिल हैं।
क्या इस टूल की तिथि सटीक है?
हाँ, तिथि सौर कैलेंडर के आधार पर गणना की गई है। विशु हर साल 14 या 15 अप्रैल को पड़ता है।
विशु न चूकें
अपना ईमेल दें — हम आपको विशु से पहले सूचित करेंगे, ताकि आप उत्सव की तैयारी कर सकें।
नोट: यहाँ की विशु तिथि सौर कैलेंडर (सूर्य के मेष राशि में प्रवेश) के आधार पर गणना की गई है। यह त्योहार पारंपरिक रूप से हर साल 14 या 15 अप्रैल को पड़ता है।
